मालेगांव सुपारी घोटाले में FDA के पांच अधिकारी निलंबित

 

महाराष्ट्र के मालेगांव सुपारी घोटाला मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। FDA मंत्री नरहरि झिरवाल और FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने यह कार्रवाई की है। आरोप है कि 252 मीट्रिक टन असुरक्षित सुपारी को केवल कागजों पर नष्ट दिखाया गया। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक ही दिन में 11 ट्रकों में भरी इतनी बड़ी मात्रा में सुपारी को नष्ट करना संभव नहीं था।

FDA के गुप्तवार्ता विभाग ने 11 फरवरी 2024 को नासिक जिले के मालेगांव में 11 ट्रकों में रखी 252.328 मीट्रिक टन सुपारी जब्त की थी। कुल 3,605 बोरियों में भरी इस सुपारी का बाजार मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपये आंका गया था। खाद्य विश्लेषकों (प्रयोगशाला) की रिपोर्ट में सुपारी को खाने के लिए अनुपयुक्त घोषित किए जाने के बाद अदालत ने 5 मार्च 2025 को इसे नष्ट करने का आदेश दिया था। जांच में सामने आया कि आदेश का पालन वास्तव में करने के बजाय केवल कागजों पर किया गया।

सचिन खैरनार की शिकायत के बाद FDA आयुक्त ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

जांच समिति के अनुसार एक ही दिन में 11 ट्रकों के जरिए 252 मीट्रिक टन सुपारी ले जाकर नष्ट करना व्यावहारिक रूप से असंभव था क्योंकि इन 11 ट्रकों की कुल औसत क्षमता महज 44 मीट्रिक टन बताई गई है।

जांच में पंचनामों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। अलग-अलग अधिकारियों के पंचनामों में एक ही वाहनों और पंच गवाहों के नाम दर्ज पाए गए। ऐसे में सवाल उठता है कि एक ही समय पर ये वाहन और गवाह दो अलग-अलग स्थानों पर कैसे मौजूद हो सकते थे। इसी आधार पर सुपारी को केवल दस्तावेजों में नष्ट दिखाए जाने का संदेह जताया गया है।

इसके अलावा सुपारी नष्ट करने के लिए महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस प्रक्रिया पर लाखों रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया लेकिन संबंधित अधिकारियों ने खर्च के बिल कार्यालय में जमा नहीं किए।

निलंबित किए गए अधिकारियों के नाम- एआर दाभाडे — खाद्य सुरक्षा अधिकारी, गुप्तवार्ता विभाग, नासिक, एयू रासकर — खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नासिक, जीवी कासार — खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नासिक, वायआर देशमुख — खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नासिक और एसडी महाजन — खाद्य सुरक्षा अधिकारी, नासिक हैं।

संबंधित पांच अधिकारियों ने दावा किया था कि नासिक विभाग के सहायक आयुक्त वी. पी. पाटिल को मौखिक सूचना देकर सुपारी नष्ट की गई थी। हालांकि, वी. पी. पाटिल ने इस दावे से इन्कार करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी ने उन्हें सुपारी नष्ट करने के आदेश के बारे में जानकारी नहीं दी थी।

वी. पी. पाटिल ने बताया कि वह 18 मार्च से 4 अप्रैल 2025 तक छुट्टी पर थे। छुट्टी से लौटने के बाद उन्होंने पांचों अधिकारियों को तीन बार लिखित पत्र भेजकर इस मामले में जवाब मांगा लेकिन किसी ने भी एक बार भी उत्तर नहीं दिया।

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